कलयुग का राछस, इस्लाम

कलयुग का राछस, इस्लाम

पिछले साल अप्रैल में मैं जब महाभारत का विश्लेषण कर रहा था, तब मैंने कहा था की जब मेरा हृदय कहेगा तब मैं इस्लाम की असलियत लिखूँगा, और आज मैं कहता हूँ, कलयुग का राछस, इस्लाम

अब न तो हिन्दू को खुश होने की जरुरत है, न ही मुसलमान को नाराज होने की, मैं वो हूँ ही नहीं जो किसी धर्म का पक्ष या किसी के खिलाफ बात करूँगा, गर नहीं समझ आये तो आप मेरे धर्म क्या है ? article पड़ सकते है।

-> चलिए शुरू करते हैं, दुनिआ जानती हैं संस्कृत दुनिया का पहली भाषा हैं और सनातन धर्म सबसे पहला धर्म। जब ये बात सच है तो राम सनातन धर्म के तरीके : पूजा , पाठ , हवन, दुसरो का सम्मान, महिलाओ की इज्जत करना, प्रेम करना वगेरा करते थे और जो उनके खिलाफ थें वो थें रावण वाली राछस जात।

वक़्त के साथ जब दूसरे धर्म सामने आयी, उनमें से एक था इस्लाम, जिसका हर तरीका सनातन धर्म के तरीके के खिलाफ था, जैसे गर सनातनी गाय की पूजा करते थे तो वो उनकी हत्या कर उन्हें खाते थे, सनातनी मुर्गी एक बार में काटकर खाते तो इस्लाम उन्हें तड़पाकर मारकर खाते थे, और भी अनेको चीजे जो वो आजकल जान बूझकर करते है सनातन धर्म का विरोध करने के लिए।

अब सोचे कौन थें जो सतयुग में सनातन धर्म का विरोध किये, रावण और राछस जात, तो जो कलयुग में इसका विरोध करे वह क्या ? राछस जात। राछस जैसे लम्बे चौड़े, बलशाली, बड़ी बड़ी दाढ़ी मुछे, मांस, मदिरा पान करते थें, बलपूर्वक दुसरो को वश में करना, अपना साम्राज्य का विस्तार बलपूर्वक करना,महिलाओ का अपमान, उनके साथ बल प्रयोग, ये सभी बाते इस युग में इस्लाम धर्म के लोगो में दिखती हैं

-> दूसरी बात, इस्लाम एक ऐसा धर्म है, जो सिर्फ क़यामत की बात करता है, कहता है, क़यामत के दिन उनका अल्लाह उनका साथ देगा, बाकि धर्म वाले अकेले तड़पते रह जायेंगे, तो अल्लाह की रह पे चलो, जिहाद के नाम पे हिंसा करो, सभी धर्म वाले काफिर है, किसी भी तरह से दूसरे धर्म वालो को इस्लाम में बदले (वही राछस जात का साम्राज्य बढ़ाने वाली नीति)।

क़यामत यानि , जिस दिन दुनिया का अंत होगा। मतलब ये लोग उस दिन की तैयारी में हैं जिस दिन दुनिया का अंत होगा। इनको कैसे पता दुनिया का अंत होगा ? या फिर ये खुद दुनिया को अंत करने के कगार में ले आया ?

एक बार जब बुद्ध वन में डाकू अंगुलिमाल से मिला तो, उसने कहा मैं तुम्हारी उँगलियाँ काटकर अपने माला बनाऊँगा, तो बुद्ध ने कहा मैं खुद तुम्हे अपनी उँगलियाँ दे दूँगा पर तुम्हे मेरे दो शर्त मानने होंगे –
(1) दूर पेड़ से एक डाली तोड़कर ले आओं, अंगुलिमाल ले आया,
(2) अंगुलिमाल ने पूछा, दूसरी शर्त ? बुद्ध ने कहा वापस जोड़ आओं, अंगुलिमाल बोले पागल हो गए हो क्या, वापस कैसे जोड़ सकते है तोड़े हुए चीज़? बुद्ध बोले, बस यही समझाना चाहता था कि तोडना बहुत आसान है, पर जोड़ना बहुत मुश्किल। अंगुलिमाल समझ गया और डकैती छोड़ बुद्ध का शिष्य बन गया।

गर इस्लाम नेक होता, तो यह लोगो को ज़िन्दगी (life) का ज्ञान सिखाता, रचनात्मक (creation) सिखाता , नाशक (destruction, क़यामत) नहीं सिखाते ।

आज पाकिस्तान जैसे मुल्क खुद को इस्लाम का ठेकेदार मानता है, जिहाद की बात करता है, दुनिया को बार बार nuclear bomb की धमकी देता हैं , वो वही कर रहा है, जिस सोच ने इनको बनाया हैं।

America ,China , UK , Russia सभी देश अपने अपने तरीके से राजनीती करते हैं , पर अब पानी हद से ज्यादा बढ़ चुका है, आज ये वक़्त नहीं जब राजनीती की जाये।

मैंने चार साल पहले कहा था , दुनिया बहुत गलत दिशा में जा रही हैं, ये शान्ति की बात करते है पर युद्ध की तयारी करते है, युद्ध की अत्याधुनिक सामान इकठ्ठा करता है। दो विष्व युद्ध हो चूका, गर तीसरी विष्व युद्ध हुआ तो दुनिया से इंसान जात ख़त्म हो जायेगा, क्यूंकि आज सबके पास nuclear bomb हैं, सब एक दूसरे से लड़कर ख़त्म हो जेएंगे, जैसे आज हम dinosaurs के बारे बारे में पढ़ते है, कि कभी ये धरती पे थे आज नहीं हैं, ठीक वैसे ही शायद इंसान जात ख़त्म हो जाये और कोई और जीव धरती पे रहने के अनुकूल हों।

इसलिए आज ही दुनिआ को संभालना होगा , बहुत हुआ राजनीती America ,China , UK , Russia, बहुत हुआ पैसे कमाना , अब खुद को बचावो और दुनिआ को भी, America दुनिया को युद्ध में झोंककर युद्ध की सामाग्री बेचना चाहते, पर वो दिन गए, क्या करोगे उन पैसो का गर तुम ही न रहे ?

इन सब बातो का मतलब ये बिलकुल नहीं की सभी इस्लामिक लोग गलत हैं, जैसे हमने देखा रावण के लंका में विभीषण जैसे नेक लोग भी थे जो प्रभु श्री राम की सत्य की लड़ाई में मदद की, जो तमाम देवता या मनुष्यो से ऊपर थें, क्यूंकि हमने देखा, एक मनुष्य की वजह से माता सीता को वन भी जाना पड़ा, तो न तो सभी मनुष्य जात सही है, न समस्त राछस जात ख़राब, ठीक वैसे ही सभी मुसलमान भी गलत नहीं हैं, पर हमें उनकी मदद चाहिए, धरती के इस युग की राछसों का संहार करने के लिए और पुनः सत्य और मानव धर्म की स्थापना करने के लिए।

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