मन को शान्त कैसे करे ?

मन को शान्त कैसे करे ?

हम अक्सर सुनते है लोग कहतें है, मन स्थिर नहीं है,मन शांत नहीं होता । फिर इक दौड़ सी शुरू होती है – मन्दिर मस्जिद की,
गुरुद्वारों की, चर्च की, पर मन को शान्त नहीं कर पाते।

अब सवाल ये कि “मन हैं क्या ?”

मन को समज़ने के लिए, मैं Computer की memory : RAM (Random Access Memory) और ROM (Read Only Memory)
का example से समझते है।

जैसे RAM एक तरह की memory हैं – 2GB, 4GB वगेरा और इसमें वो information store होती है जो हम प्रायः (Random Access)
इस्तेमाल करते हैं।

वैसे ही मन वह हिस्सा होती है हमारी memory का, जिसे हम हर रोज़ जीते हैं, जैसे किसी ने डाट दिया और हम बार-बार उस बात को सोचकर दुखी होतें हैं, किसी ने कुछ अच्छा किया तो अच्छा लगता हैं, हमें जिनसे प्यार होता है हम सिर्फ उनके बारे में सोचते हैं, दूसरी तरह
से कहे तो ये हमारी day to day emotions होते हैं, जिन्हें हम हर रोज़ जीते है।

जबकि ROM (hard drive or Memory) 500 GB, 1 TB वगेरा होती है, ठीक वैसे ही हमारा दिमाग (brain) हैं, हमारे साथ जो भी चीजे घटती हैं, सभी information, Memory में store हो जाती है।

अब हम इन सबको जोड़ते है :
-> Memory, bundle of information होती है, जो हम देखते है, सुनते है, सीखतें है, feel करते है, सभी information का collection, जैसे की हमारा दिमाग ।
-> मन भी Memory है पर short time Memory, जो हम day to day जीते है।
तो जब मन Memory है, तो यह तो आपको याद आएगी ही, आप इससे भाग नहीं सकते, मंदिर, मस्जिद, कही भी चले जाईये , मन शांत नहीं होगा,
क्यूंकि आप तो किसी न किसी emotions को हर रोज़ जीते है, तो वह तो याद आएगा ही।

हाँ आप अपनी मन (Memory) को modify जरूर कर सकते हैं, मतलब गर आप खुद को भगवान् को अर्पित करना चाहते तो आपके आस पास
के लोग या माहौल आध्यात्मिक हो तो आप वैसे बाते जीओगे वही आपको याद आएगा और इसबार आपको सुख की अनुमभीति होगी की मन में सिर्फ प्रभु का ध्यान है ।

यही बात सभी बातो के लिए सत्य हैं, आप जैसी चीजे जीना चाहतें वैसे चीजे मन (RAM) में feed
करे और आपको मज़ा आने लगेगा जिंदगी में।

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3 Comments on “मन को शान्त कैसे करे ?

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